नई दिल्ली, भारत (UNA) : ‘India’s Got Latent’ विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन सामग्री की निगरानी और उम्र-आधारित प्रतिबंधों को लेकर कड़े नियमों पर विचार शुरू किया है। अदालत का मानना है कि मौजूदा स्व-नियमन प्रणाली पर्याप्त नहीं है, और नाबालिगों के लिए अनुपयुक्त सामग्री तक पहुँच को रोकने के लिए अधिक प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि उम्र की पुष्टि के लिए आधार या किसी अन्य सुरक्षित डिजिटल प्रणाली का उपयोग एक विकल्प हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल ऑन-स्क्रीन चेतावनी दिखाने से स्थिति नहीं सुधरती, क्योंकि वह कंटेंट तक पहुँच को प्रभावी रूप से नियंत्रित नहीं कर पाती।
न्यायालय ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या एक स्वतंत्र निगरानी तंत्र बनाया जा सकता है, जो ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर सामग्री वर्गीकरण और आयु-सीमा पालन की जांच निष्पक्ष तरीके से कर सके।
अदालत का कहना है कि किसी भी नए मॉडल को लागू करने से पहले उसका पायलट परीक्षण आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, निजता और डिजिटल अधिकारों का उल्लंघन न करे। - UNA















